कार में Indicator चलाते ही “टिक-टिक” क्यों होती है? कार का ये साउंड क्यों जरूरी है?

By mansi

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कार इंडिकेटर से आने वाली ‘टिक-टिक’ आवाज का दिलचस्प इतिहास और कारण

जब भी आप कार चलाते समय मुड़ने के लिए इंडिकेटर (Indicator) का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको एक विशिष्ट ‘टिक-टिक’ की आवाज सुनाई देती है। आधुनिक कारों में जहाँ सब कुछ डिजिटल और शांत होता जा रहा है, वहां इस आवाज का बना रहना कई लोगों को हैरान करता है। दरअसल, यह आवाज केवल एक संकेत नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा तकनीकी इतिहास और सुरक्षा का उद्देश्य छिपा है। शुरुआत में यह आवाज एक मैकेनिकल मजबूरी थी, लेकिन आज इसे जानबूझकर कारों का हिस्सा बनाए रखा गया है ताकि चालक को बिना डैशबोर्ड देखे यह पता चल सके कि उसका इंडिकेटर चालू है।

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पुराने समय की थर्मल फ्लैशर तकनीक

पुराने समय की गाड़ियों में इंडिकेटर को चालू और बंद करने के लिए ‘Thermal Flasher’ नामक एक छोटे पुर्जे का उपयोग किया जाता था। इस फ्लैशर के अंदर एक द्विधात्विक (Bi-metallic) पत्ती होती थी जिसके माध्यम से विद्युत धारा प्रवाहित होती थी। जब आप इंडिकेटर चालू करते थे, तो बिजली इस पत्ती को गर्म करती थी, जिससे वह मुड़ जाती थी और सर्किट टूट जाता था। सर्किट टूटने से लाइट बंद हो जाती थी और पत्ती ठंडी होकर वापस अपनी जगह पर आ जाती थी, जिससे सर्किट फिर से जुड़ जाता था। इस प्रक्रिया में जब धातु की पत्ती बार-बार संपर्क बनाती और तोड़ती थी, तो उससे प्राकृतिक रूप से ‘टिक-टिक’ की आवाज पैदा होती थी।

आधुनिक कारों में इलेक्ट्रॉनिक रिले का उपयोग

जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ी, थर्मल फ्लैशर की जगह ‘Electronic Relay’ ने ले ली। ये रिले अधिक सटीक और टिकाऊ होते हैं। रिले के भीतर एक इलेक्ट्रोमैग्नेट (Electromagnet) होता है जो एक धातु के संपर्क को खींचता और छोड़ता है ताकि लाइट जल-बुझ (Flash) सके। आधुनिक कारों में आने वाली टिक-टिक की आवाज इसी रिले के भीतर होने वाली मैकेनिकल हलचल के कारण होती है। हालांकि, आज की कई प्रीमियम कारों में यह पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर चिप (ECU) द्वारा नियंत्रित की जाती है, जहाँ किसी भी तरह की मैकेनिकल हलचल नहीं होती, फिर भी वहां यह आवाज सुनाई देती है।

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डिजिटल युग में कृत्रिम आवाज का महत्व

आजकल की बहुत सी आधुनिक गाड़ियों में जहाँ पूरी तरह से डिजिटल डैशबोर्ड और साइलेंट फीचर्स होते हैं, वहां इंडिकेटर की आवाज को ‘Audio Speaker’ के जरिए कृत्रिम (Artificial) रूप से पैदा किया जाता है। कार निर्माता कंपनियां सॉफ्टवेयर के माध्यम से इस आवाज को डैशबोर्ड के भीतर लगे छोटे स्पीकर से बजाती हैं। इसका मुख्य कारण ‘Psychological Comfort’ और सुरक्षा है। यदि इंडिकेटर बिल्कुल शांत होगा, तो चालक उसे बंद करना भूल सकता है, जिससे पीछे से आने वाले अन्य वाहनों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।

सुरक्षा और फीडबैक का माध्यम

इंडिकेटर की यह आवाज चालक के लिए एक महत्वपूर्ण ‘Feedback Loop’ की तरह काम करती है। यह बिना नजरें सड़क से हटाए आपको सुनिश्चित करती है कि आपका टर्न सिग्नल सही काम कर रहा है। इसके अलावा, यदि आपके इंडिकेटर की टिक-टिक की आवाज सामान्य से अधिक तेज या धीमी हो जाए, तो यह इस बात का संकेत होता है कि आपकी कार का कोई बल्ब फ्यूज हो गया है या वायरिंग में कोई समस्या है। इस तरह, यह छोटी सी आवाज एक डायग्नोस्टिक टूल (Diagnostic Tool) के रूप में भी काम करती है, जो वाहन के इलेक्ट्रिक सिस्टम की सेहत के बारे में बताती है।

भविष्य की कारों में इस आवाज की स्थिति

भविष्य में आने वाली पूरी तरह से स्वायत्त (Autonomous) और इलेक्ट्रिक कारों में भी इस आवाज के बने रहने की पूरी संभावना है। हालांकि इलेक्ट्रिक कारें बहुत शांत होती हैं, लेकिन मानवीय स्वभाव के अनुसार हम कुछ ध्वनियों के अभ्यस्त हो चुके हैं। कार कंपनियां अब इस आवाज की ‘Tone’ को कस्टमाइज करने पर भी विचार कर रही हैं, ताकि इसे और अधिक सुखद बनाया जा सके। निष्कर्षतः, वह टिक-टिक की आवाज जो कभी एक धातु के गर्म होने की मजबूरी थी, आज सुरक्षा और चालक की सुविधा का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।

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